Thursday, July 19th, 2018
दिल्ली

दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- हम अभी भी अफसरों का ट्रांसफर और पोस्टिंग नहीं कर पा रहे

नई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हमारा कामकाज पूरी तरह से ‘पैरेलाइज्ड’ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले के बावजूद हम दिल्ली में अफसरों का ट्रांसफर या पोस्टिंग नहीं कर पा रहे हैं। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि हमें सब पता है और इस पर 26 जुलाई को सुनवाई होगी। इस मामले में सुप्रीम काेर्ट के जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच में सुनवाई हुई।
दिल्ली सरकार की तरफ से पी चिदंबरम और इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दीं। चिदंबरम ने कहा कि दिल्ली में प्रशासनिक कामकाज के बारे में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हर पहलू को विस्तार से बताया था, लेकिन सरकार अफसरों की तैनाती या तबादले नहीं कर पा रही है। इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अफसर इस मुद्दे पर हलफनामा भी नहीं देना चाहते। यही वजह है कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने हलफनामा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- उपराज्यपाल स्वतंत्र फैसले नहीं ले सकते : केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 4 जुलाई को फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था, “दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल स्वतंत्र फैसले नहीं ले सकते। उनकी भूमिका खलल डालने वाली नहीं होनी चाहिए।” चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने यह भी कहा कि उपराज्यपाल न तो हर मामला राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं, न ही दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जा सकता है।

तीन साल से एलजी-केजरी में चल रही जंग : केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों की लड़ाई 2014 में तब शुरू हुई, जब अरविंद केजरीवाल ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और यूपीए में तत्कालीन मंत्री वीरप्पा मोइली समेत अन्य के खिलाफ गैस के दाम तय करने को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। 8 मई 2014 को केंद्र ने दिल्ली के एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा केंद्रीय मंत्रियों की जांच का विरोध किया। इसके बाद एलजी ने ब्यूरो में एमके मीणा की नियुक्ति कर दी। इसके खिलाफ आप सरकार हाईकोर्ट गई। हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के एडमिनिस्ट्रेटिव हेड एलजी हैं और वे मंत्रियों की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस फैसले के खिलाफ आप सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।